-
धनासरी महला १॥ जीवा तेरै नाइ मनि आनंदु है जीउ॥ साचो साचा नाउ गुण गोविंदु है जीउ॥ गुर गिआनु अपारा सिरजणहारा जिनि सिरजी तिनि गोई॥ परवाणा आइआ हुकमि पठाइआ फेरि न सकै कोई ॥ आपे करि वेखै सिरि सिरि लेखै आपे सुरति बुझाई ॥ नानक साहिबु अगम अगोचरु जीवा सची नाई ॥१॥ तुम सरि अवरु.