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Tag: Shri Harimandir Sahib Ji

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 06 जुलाई 2024

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 29 जून 2024

गूजरी महला ३ ॥ तिसु जन सांति सदा मति निहचल जिस का अभिमानु गवाए ॥ सो जनु निरमलु जि गुरमुखि बूझै हरि चरणी चितु लाए ॥१॥ हरि चेति अचेत मना जो इछहि सो फलु होई ॥ गुर परसादी हरि रसु पावहि पीवत रहहि सदा सुखु होई ॥१॥

हुक्मनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 28 जून 2024

बैराड़ी महला ४ ॥ हरि जनु राम नाम गुन गावै ॥ जे कोई निंद करे हरि जन की अपुना गुनु न गवावै ॥१॥ रहाउ ॥ जो किछु करे सु आपे सुआमी हरि आपे कार कमावै ॥ हरि आपे ही मति देवै सुआमी हरि आपे बोलि बुलावै ॥१॥

हुकनामा श्री हरिमंदिर साहिब जी 27 जून 2024

बैराड़ी महला ४ ॥ हरि जनु राम नाम गुन गावै ॥ जे कोई निंद करे हरि जन की अपुना गुनु न गवावै ॥१॥ रहाउ ॥ जो किछु करे सु आपे सुआमी हरि आपे कार कमावै ॥

हुकनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 26 जून 2024

रामकली महला ५ ॥ राखनहार दइआल ॥ कोटि भव खंडे निमख खिआल ॥ सगल अराधहि जंत ॥ मिलीऐ प्रभ गुर मिलि मंत ॥१॥ जीअन को दाता मेरा प्रभु ॥ पूरन परमेसुर सुआमी घटि घटि राता मेरा प्रभु ॥१॥ रहाउ ॥

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 23 जून 2024

बिलावलु महला ४ असटपदीआ घरु ११ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ आपै आपु खाइ हउ मेटै अनदिनु हरि रस गीत गवईआ ॥ गुरमुखि परचै कंचन काइआ निरभउ जोती जोति मिलईआ ॥१॥ मै हरि हरि नामु अधारु रमईआ ॥

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 22 जून 2024

धनासरी महला ५ घरु ६ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ सुनहु संत पिआरे बिनउ हमारे जीउ ॥ हरि बिनु मुकति न काहू जीउ ॥ रहाउ ॥ मन निरमल करम करि तारन तरन हरि अवरि जंजाल तेरै काहू न काम जीउ ॥ जीवन देवा पारब्रहम सेवा इहु उपदेसु मो कउ गुरि दीना जीउ ॥१॥

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 20 जून 2024

सलोकु मः ३ ॥ सेखा चउचकिआ चउवाइआ एहु मनु इकतु घरि आणि ॥ एहड़ तेहड़ छडि तू गुर का सबदु पछाणु ॥ सतिगुर अगै ढहि पउ सभु किछु जाणै जाणु ॥ आसा मनसा जलाइ तू होइ रहु मिहमाणु ॥

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 19 जून 2024

धनासरी महला ५ ॥ नामु गुरि दीओ है अपुनै जा कै मसतकि करमा ॥ नामु द्रिड़ावै नामु जपावै ता का जुग महि धरमा ॥१॥ जन कउ नामु वडाई सोभ ॥ नामो गति नामो पति जन की मानै जो जो होग ॥१॥ रहाउ ॥

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 17 जून 2024

जो जनु भाउ भगति कछु जानै ता कउ अचरजु काहो ॥ जिउ जलु जल महि पैसि न निकसै तिउ ढुरि मिलिओ जुलाहो ॥१॥ हरि के लोगा मै तउ मति का भोरा ॥ जउ तनु कासी तजहि कबीरा रमईऐ कहा निहोरा ॥१॥ रहाउ ॥

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 15 जून 2024

सलोक ॥संत उधरण दइआलं आसरं गोपाल कीरतनह ॥ निरमलं संत संगेण ओट नानक परमेसुरह ॥१॥ चंदन चंदु न सरद रुति मूलि न मिटई घांम ॥ सीतलु थीवै नानका जपंदड़ो हरि नामु ॥२॥ पउड़ी ॥

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