कुरुक्षेत्र। Swami Gyananand said do social service गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता का मूल संदेश केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि उस ज्ञान को जीवन में उतारकर कर्म के माध्यम से समाज सेवा करना है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक सदस्य अपने जीवन में निष्काम भाव से सेवा कार्यों को अपनाएं और समाज के उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाए। श्री कृष्ण कृपा परिवार जीओ गीता की विभिन्न नगरों में संचालित समितियों के कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में देशभर में चल रहे सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ आगामी वर्ष के लिए व्यापक योजनाओं पर गंभीरता एवं विस्तार पूर्वक विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान समितियों के पदाधिकारियों से उनके सुझाव आमंत्रित किए गए। उन सुझावों को योजनाबद्ध तरीके से धरातल पर उतारने को लेकर प्रेरित किया गया। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि सभी समितियां केवल योजनाएं न बनाएं, बल्कि उन्हें समयबद्ध रूप से क्रियान्वित भी करें।
उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण कृपा जीओ गीता परिवार की प्रत्येक संस्था प्रति माह कम से कम एक सामाजिक और आध्यात्मिक प्रकल्प अवश्य संचालित करें। इन प्रकल्पों में स्वच्छता अभियान, जल सेवा, फल वितरण, गीता पाठ, युवा जागरूकता कार्यक्रम गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाए, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों तक सकारात्मक ऊर्जा और संस्कारों का संचार हो सके। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने बताया कि यह मास आध्यात्मिक उन्नति, आत्मशुद्धि एवं भक्ति के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी समय होता है।
उन्होंने सभी समितियों, महिला मंडलों और बाल संस्कार कक्षाओं को निर्देशित किया कि वे पुरुषोत्तम मास के महत्व का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ें। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय को संस्कृत में कंठस्थ करने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक दृढ़ता और स्पष्टता आती है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि स्वामी गीतानंद (वीर जी) के 20 नवंबर जन्मोत्सव से लेकर गीता जयंती 20 दिसंबर तक एक माह की अवधि में प्रत्येक नगर में गीता सम्मान यात्रा आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
इस अभिनव अभियान के अंतर्गत गीता को प्रत्येक घर में 24-24 घंटे के लिए सम्मानपूर्वक विराजित किया जाएगा। इस दौरान संबंधित परिवार एवं क्षेत्र में गीता पाठ, गीता यज्ञ, सत्संग एवं आध्यात्मिक चर्चाओं का आयोजन किया जाएगा। महाराज जी ने सभी समितियों को संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया और कहा कि जब सभी इकाइयां एक दिशा, एक लक्ष्य और एक भावना के साथ कार्य करेंगी, तभी बड़े स्तर पर प्रभाव उत्पन्न होगा।
जेलों एवं अन्य संस्थानों में भी गीता पाठ एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रयास करने का आह्वान किया गया, जिससे वहां रह रहे लोगों को भी आत्मिक शांति एवं सकारात्मक दिशा मिल सके। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल लिपि में गीता उपलब्ध करवाने के संकल्प को भी विशेष रूप से सराहा गया और इसे प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
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