Last Updated: September 22, 2026

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किसानों से खाद छीनने का सरकार का नया षड्यंत्र : रणदीप सुरजेवाला

April 12, 2026

किसानों से खाद छीनने का सरकार का नया षड्यंत्र : रणदीप सुरजेवाला

कैथल। कांग्रेस के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि ₹41,500 करोड़ की अतिरिक्त खाद सब्सिडी का ढिंढोरा पीटने के बावजूद सरकार ने फार्मर आईडी और ई-पीओएस मशीनों के नाम पर देशभर में खाद की सरेआम राशनिंग शुरू कर दी है।

बोले- छोटे और भूमिहीनों किसानों से धोखा

सुरजेवाला ने कहा कि नई व्यवस्था के बहाने सरकार जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर खाद उपलब्ध करा रही है। इससे ठेके और बटाई पर खेती करने वाले आधे से ज्यादा किसान खाद से वंचित हो जाएंगे। क्या भाजपा सरकार ने भूमिहीन और छोटे किसानों को किसान मानना ही छोड़ दिया है? यह उनके साथ सीधा धोखा है।

प्रति हेक्टेयर सात बोरी यूरिया की लिमिट

सुरजेवाला ने राज्य-स्तरीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रति हेक्टेयर अधिकतम 7 बोरी यूरिया की लिमिट लगा दी गई है। हरियाणा में ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के माध्यम से प्रति एकड़ मात्र 3 कट्टे की पाबंदी कर दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक डायवर्जन और कालाबाजारी रोकने के नाम पर किसानों की खाद को कोटा सिस्टम में बांध दिया है।

कहा- कटौती के बाद कहां से मिलेगी खाद

सुरजेवाला ने सरकार के बजट आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में खाद सब्सिडी का वास्तविक खर्च ₹2.54 लाख करोड़ से अधिक था, जबकि 2026-27 के बजट में इसे घटाकर मात्र ₹1.71 लाख करोड़ कर दिया गया है। सरकार ने खुद सब्सिडी में भारी कटौती की, फिर किसानों को खाद कहां से मिलेगी? यह राशनिंग बजट कटौती से पैदा हुई किल्लत को छिपाने का हथकंडा है।

सुरजेवाला ने पूछे सरकार से सवाल

उन्होंने यह भी कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया और अन्य खादों के दाम 140 प्रतिशत तक बढ़ गए थे, तब भी सरकार ने किसानों को राहत देने के बजाय सब्सिडी बजट कम कर दिया। जिससे सप्लाई चेन चरमरा गई और किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार से सवाल किया कि अपनी बजट कटौती का दंड अन्नदाता किसानों को क्यों दिया जा रहा है? किसानों को उनकी हक की पूरी खाद चाहिए, पाबंदियां और राशनिंग नहीं। उन्होंने फार्मर आईडी और ई-पीओएस व्यवस्था को किसानों पर थोपी गई नई मुसीबत बताया और मांग की कि सरकार तुरंत इस राशनिंग को वापस लें।

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