कैथल। हरियाणा रोडवेज डिपो में बसों की कमी के चलते कई रूटों पर सेवा बंद हो गई है। कई बड़े रूटों पर यह सेवा शुरू नहीं हो रही है। इन रूटों पर अधिकतर धार्मिक रूट हैं।
इस समय कैथल में 160 बसें हैं और इनमें से 46 ही बीएस-6 माडल की हैं। बाकी बसें पुरानी हैं और रास्ते में खराब भी हो जाती हैं। यदि बात की जाए बसों की कमी की तो यहां 90 बसों की कमी है। डिपो की तरफ से नई बसें मांगी गई हैं। ये मांग कब पूरी होगी यह तो समय ही बताएगा। इन बंद रूटों में वैद्यनाथ, पुष्कर, गंगानगर और बीकानेर जैसे रूट शामिल हैं। डिपो को वैद्यनाथ रूट के लिए कुछ समय पहले ही परमिट जारी हुआ था। अन्य रूटों के लिए पहले से ही परमिट डिपो के पास है, लेकिन बसों के अभाव में अब तक संचालन शुरू नहीं हो सका है।
इन रूटों पर यात्रा करने वाले लोगों को मजबूरी में निजी बसों या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, इससे उनका खर्च बढ़ गया है। खासकर धार्मिक स्थलों वैद्यनाथ और पुष्कर जाने वाले यात्रियों को ज्यादा परेशानी हो रही है। गंगानगर और बीकानेर जैसे शहरों के लिए भी नियमित यातायात प्रभावित हो रहा है। यात्रियों के अनुसार लंबे समय से इन रूटों पर बस सेवा की मांग की जा रही थी। परमिट मिलने के बाद उम्मीद जगी थी कि अब सुविधा शुरू हो जाएगी, लेकिन बसों की कमी के कारण समस्या का हल नहीं हो पाया है।
यात्रियों ने परिवहन विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द नई बसें उपलब्ध कराकर इन रूटों पर सेवाएं शुरू की जाएं। रोडवेज डिपो में लगातार बसें कंडम घोषित की जा रही हैं। करीब एक साल में करीब 52 बसें कंडम की जा चुकी हैं। ऐसे में डिपो में लगातार बसों की संख्या भी कम हो रही हैं। जो बसें कंडम की गई हैं वे अपने दस वर्ष और दस लाख किलोमीटर पूरे कर चुकी थी। ये बसें पुरानी होने के कारण लोकल रूटों पर चलती थी। कई बार रास्ते में खराब हो जाती थी, जिससे यात्रियों को भी परेशानी होती थी।
बसें कम होने के कारण डिपो की तरफ से दस से ज्यादा रूटों पर बसों के चक्कर कम कर दिए गए हैं। डिपो में अभी भी बीएस-थ्री की करीब 35 बसें है जिनकी हालात खराब हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर बसें रिपेयर के लिए वर्कशाप में खड़ी रहती है। एनसीआर के जिलों में भेजने के लिए डिपो के पास 46 बसें ही उपलब्ध है। हालांकि किलोमीटर स्कीम के तहत 23 बसों का संचालन भी किया जा रहा है।
इस संंबंध में कैथल रोडवेज डिपो के यातायात प्रबंधन विपुल कुमार का कहना है कि बसों की कमी को लेकर मुख्यालय को अवगत करवाया हुआ है। जल्द नई बसें मिलने की उम्मीद है। जुलाई के महीने तक करीब 10 बसें डिपो में शामिल हो सकती हैं। उसके बाद सभी रूटों पर बसों का संचालन किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि यात्रियों को कोई परेशानी ना हो।
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