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जानिए कौन सा तेल आपकी सेहत के लिए सबसे बेहतर है?

Healthiest Cooking Oil

Healthiest Cooking Oil

भारतीय रसोई में खाना पकाने के लिए तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। सब्जी बनाने से लेकर पूड़ी, पराठे और पकौड़े तलने तक, अलग-अलग तरह के तेल इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन जब बात सेहत की आती है तो अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर सबसे हेल्दी कुकिंग ऑयल कौन सा है?

बाजार में सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, सूरजमुखी का तेल, सोयाबीन ऑयल, राइस ब्रान ऑयल, ऑलिव ऑयल और नारियल तेल जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। हर तेल की अपनी अलग पोषण संरचना होती है। इसलिए किसी एक तेल को हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा बताना सही नहीं होगा। तेल चुनने के साथ-साथ उसकी मात्रा और इस्तेमाल करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

सबसे पहले समझिए कि तेल में क्या होता है
कुकिंग ऑयल मुख्य रूप से फैट से बना होता है। शरीर को फैट की जरूरत होती है, क्योंकि यह ऊर्जा देने के साथ-साथ कुछ विटामिन्स के अवशोषण में भी मदद करता है। लेकिन सभी प्रकार के फैट शरीर के लिए समान नहीं होते।

अनसैचुरेटेड फैट, खासकर मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स, आमतौर पर सैचुरेटेड फैट की तुलना में बेहतर माने जाते हैं। दूसरी ओर, बहुत अधिक सैचुरेटेड फैट का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ट्रांस फैट को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। इसी वजह से तेल का चुनाव केवल उसके नाम या विज्ञापन के आधार पर नहीं बल्कि उसमें मौजूद फैट के प्रकार को समझकर करना चाहिए।

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क्या सरसों का तेल हेल्दी विकल्प है?
भारतीय घरों में लंबे समय से सरसों के तेल का इस्तेमाल होता रहा है। इसमें मुख्य रूप से अनसैचुरेटेड फैट पाया जाता है और इसमें कुछ ऐसे फैटी एसिड भी होते हैं जो इसे कई भारतीय व्यंजनों के लिए उपयोगी बनाते हैं। सरसों के तेल का स्वाद और खुशबू काफी तेज होती है इसलिए हर व्यक्ति इसे पसंद नहीं करता। इसका इस्तेमाल सब्जी, दाल, अचार और कई पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है।

हालांकि किसी भी तेल की तरह सरसों के तेल का भी सीमित मात्रा में सेवन करना जरूरी है। केवल इसलिए कि कोई तेल पारंपरिक है इसका मतलब यह नहीं कि इसे असीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।

मूंगफली का तेल भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है
मूंगफली के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स पाए जाते हैं। इसका स्वाद अपेक्षाकृत हल्का होता है और यह भारतीय खाना पकाने के लिए काफी लोकप्रिय है। यह तेल सामान्य खाना पकाने और कई तरह की Cooking Methods के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि जिन लोगों को मूंगफली से एलर्जी है उन्हें इससे बचना चाहिए।

ऑलिव ऑयल क्या हर तरह के खाना पकाने के लिए सबसे अच्छा है?
ऑलिव ऑयल को अक्सर दुनिया के सबसे हेल्दी तेलों में गिना जाता है, खासकर एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को। इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स और कुछ एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह की भारतीय कुकिंग के लिए एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल ही सबसे अच्छा विकल्प होगा। एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल आमतौर पर सलाद, हल्की कुकिंग और ऐसे व्यंजनों में किया जाता है जिनमें बहुत ज्यादा तापमान की जरूरत नहीं होती।वहीं अलग-अलग प्रकार के Olive Oil की संरचना और उपयोग अलग हो सकते हैं। इसलिए खरीदते समय लेबल को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

राइस ब्रान ऑयल को भी लोग क्यों पसंद करते हैं?
राइस ब्रान ऑयल चावल की बाहरी परत से निकाला जाता है और इसमें Unsaturated Fat पाया जाता है। इसमें कुछ प्राकृतिक यौगिक भी मौजूद होते हैं, जिनकी वजह से इसे कई लोग संतुलित डाइट का हिस्सा मानते हैं। इसका स्वाद हल्का होता है और इसे रोजाना खाना पकाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, यहां भी सबसे महत्वपूर्ण बात तेल की कुल मात्रा है।

नारियल तेल के बारे में क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
नारियल तेल का इस्तेमाल भारतीय घरों में खासकर दक्षिण भारत में लंबे समय से किया जाता है। इसमें Saturated Fat की मात्रा कई अन्य वनस्पति तेलों की तुलना में अधिक होती है। यही वजह है कि नारियल तेल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा होती रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि नारियल तेल को पूरी तरह से खाना बंद कर देना चाहिए लेकिन इसे बहुत अधिक मात्रा में इस्तेमाल करने के बजाय संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना बेहतर माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति को हृदय संबंधी समस्या या कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी चिंता है तो उसे अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए।

सूरजमुखी और सोयाबीन तेल को लेकर क्या ध्यान रखें?
सूरजमुखी और सोयाबीन तेल में पॉलीअनसेचुरेटेड फैट पाया जाता है। ये तेल कई घरों में रोजाना खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इन तेलों को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन्हें संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया जाए और बार-बार गर्म किए गए तेल से बचा जाए। एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें ऐसे रासायनिक बदलाव हो सकते हैं जो स्वास्थ्य के लिए बेहतर नहीं माने जाते।

क्या तेल बदल-बदलकर इस्तेमाल करना चाहिए?
कई पोषण विशेषज्ञ अलग-अलग प्रकार के तेलों को संतुलित तरीके से इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर दिन नया तेल इस्तेमाल किया जाए। उदाहरण के लिए एक घर में रोजाना खाना पकाने के लिए सरसों या मूंगफली का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि कुछ व्यंजनों के लिए अन्य तेलों का सीमित इस्तेमाल किया जा सकता है। तेल बदलने से ज्यादा जरूरी यह है कि कुल फैट का सेवन आपकी पूरी डाइट के अनुरूप हो।

सबसे बड़ा सवाल: कितना तेल खाना चाहिए?
कई लोग तेल के प्रकार पर तो ध्यान देते हैं लेकिन उसकी मात्रा को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तव में एक हेल्दी तेल भी अगर जरूरत से ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो शरीर में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ा सकता है। तेल का सही सेवन हर व्यक्ति की उम्र, शारीरिक गतिविधि, कुल डाइट और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए किसी एक निश्चित मात्रा को हर व्यक्ति के लिए सही नहीं माना जा सकता। खाने में तेल की मात्रा कम रखना, तले हुए खाद्य पदार्थों का सीमित सेवन करना और संतुलित डाइट लेना स्वास्थ्य के लिए अधिक महत्वपूर्ण है।

बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल से बचें
तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता। खासकर जब तेल को बहुत अधिक तापमान पर गर्म किया जाए या उसमें बार-बार खाना तला जाए। ऐसे तेल को दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय कम मात्रा में तेल लेकर खाना बनाना बेहतर विकल्प है। घर पर इस्तेमाल किए गए तेल को लंबे समय तक स्टोर करके बार-बार गर्म करने से भी बचना चाहिए।

तो आखिर सबसे हेल्दी कुकिंग ऑयल कौन सा है?
इस सवाल का कोई एक जवाब नहीं है। सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, राइस ब्रान ऑयल और कुछ परिस्थितियों में ऑलिव ऑयल, सभी संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं।

सबसे अच्छा तेल वह है जिसमें आपके खाना पकाने के तरीके के अनुसार उपयुक्त फैट प्रोफाइल हो, जिसे आप सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें और जिसे बार-बार गर्म करके उपयोग न करें। अगर किसी व्यक्ति को हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, डायबिटीज या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो उसके लिए तेल का चुनाव व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए।

इसलिए स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा तरीका सिर्फ तेल बदलना नहीं बल्कि कुल तेल की मात्रा को नियंत्रित करना, संतुलित आहार लेना और अलग-अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना है।

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