Site icon Dainik Savera Times

ये है नवाबों का शहर, धुएं में दफन चीखें आज भी मांग रहीं जवाब

city of Nawabs, the screams buried in smoke still demand answers

city of Nawabs, the screams buried in smoke still demand answers

Aliganj Coaching Fire Incident : लखनऊ। यहां की गलियों ने नवाबों की तहजीब, इमारतों की शान और खुशियों की अनगिनत कहानियां देखी हैं। इसके साथ ही कई बार यही शहर आग की उन लपटों का गवाह बना, जिसने न सिर्फ इमारतों को राख किया बल्कि कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी।

समय बीता, सवाल आज भी वही

अलीगंज कोचिंग अग्निकांड ने एक बार फिर उन दर्दनाक हादसों के जख्म हरे कर दिए हैं, जिनकी राख आज भी लोगों की यादों में सुलग रही है। हर अग्निकांड के बाद कुछ तस्वीरें पीछे छूट जाती हैं। अपनों को खोजती आंखें, अस्पतालों के बाहर टूटते परिवार, और उन मासूम जिंदगियों का अधूरा सफर, जो सिस्टम की लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की भेंट चढ़ गईं। सवाल आज भी वही है कि आखिर कितनी जानें जाने के बाद जिम्मेदारियां तय होंगी? क्योंकि इन हादसों में खोए अपनों के आंसुओं का हिसाब आज तक कोई नहीं दे पाया है।

पहला हादसा : 19 जून 2018

चारबाग रेलवे स्टेशन के पास स्थित होटल SSJ इंटरनेशनल के एसी में शॉर्ट-सर्किट से आग लगी, जिसने निकट स्थित होटल को भी अपनी चपेट में ले लिया। दोनों होटलों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी थी। धुएं से दम घुटने और जलने से सात लोगों की मौत हो गई और कई से झुलस गए।

दूसरा हादसा : 15 अप्रैल 2026

विकासनगर के सेक्टर 11 की एक बस्ती में आग लग गई। इसमें लगभग 280 से अधिक मजदूरों के परिवार थे। इस दौरान झुग्गियों के अंदर रखे 50 से अधिक एलपीजी सिलिंडरों में धमाके हुए, जिसने आग को बेकाबू कर दिया। इस हादसे में दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि एक हजार से अधिक लोग बेघर हो गए।

तीसरा हादसा : 15 जून 2026

नगराम के देवती गांव स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। इसकी चपेट में फैक्ट्री मालिक की भांजी खुजौली निवासी मारिया की मौत हो गई, जबकि 16 वर्षीय मोहित घायल हो गया। सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए फैक्ट्री मालिक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया था।

चौथा हादसा : 5 सितंबर 2022

हजरतगंज स्थित चार मंजिला होटल लेवाना सुइट्स में सुबह के समय भीषण आग लग गई थी। होटल में आपातकालीन निकास न होने और खिड़कियों पर लोहे के ग्रिल लगे होने के कारण लोग अंदर ही फंस गए। हादसे में झुलसने और दम घुटने से 4 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए थे।

पांचवां हादसा : 26 मार्च 2015

अमीनाबाद की मेडिसिन मार्केट में आग लग गई। आग ने जल्द ही विकराल रूप धारण कर लिया। कई परिसर इसकी चपेट में आ गए। संकरी गलियों के कारण फायर ब्रिगेड को अंदर घुसने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस हादसे में करोड़ों रुपये की दवाएं और लगभग 50 से अधिक दुकानें जलकर खाक हो गईं।

एक हादसा ये भी : 15 मई 2025

दिल्ली से बिहार जा रही एक स्लीपर बस जब लखनऊ बाईपास रूट से गुजर रही थी, तब उसमें आग लग गई। बस में क्षमता से अधिक लोग सवार थे। आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर सो रहे यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला। घटना में पांच यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोगों ने खिड़कियों से कूदकर जान बचाई।

Also Read :

Exit mobile version