Last Updated: October 15, 2026

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अनछुए पर्यटन स्थलों में विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करवाने को प्रदेश सरकार दे रही है बल

February 12, 2024

अनछुए पर्यटन स्थलों में विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध करवाने को प्रदेश सरकार दे रही है बल

सरकार के इन प्रयासों से जहां प्रदेश में पर्यटकों को बेहतर अधोसंरचना सुविधाएं सुनिश्चित हो रही हैं तो वहीं अनछुए पर्यटन स्थलों के विकास को भी खासा बल दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला की चौहार घाटी तथा कांगड़ा जिला का छोटा भंगाल क्षेत्र दो ऐसे अनछुए पर्यटन स्थल हैं, जो पर्यटन की दृष्टि से बेहद खूबसूरत हैं।

यदि मंडी जिला की चौहार घाटी की बात करें तो बरोट गांव ऊहल नदी के दोनों ओर बसा एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। बरोट में जहां प्राकृतिक खूबसूरती भरी पड़ी है तो वहीं सर्दियों में बर्फ का भी दीदार होता है। बरोट गांव ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। हिमाचल प्रदेश की मैगावॉट स्तर की पहली पनबिजली परियोजना का डैम इसी गांव में निर्मित किया गया है।

वर्ष 1922 के आसपास तत्कालीन पंजाब सरकार के चीफ इंजीनियर कर्नल बी.सी. बैटी ने जोगिन्दर नगर के शानन नामक स्थान पर पनबिजली परियोजना निर्माण की परिकल्पना की थी। वर्ष 1925 में तत्कालीन भारत सरकार व मंडी रियासत के राजा जोगिन्द्र सेन के साथ पनबिजली परियोजना निर्माण को लेकर एक समझौता हुआ। इसी समझौते के तहत जोगिन्दर नगर कस्बे के शानन नामक स्थान पर पहले चरण में 48 मैगावॉट पनबिजली परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुआ जो वर्ष 1932 में पूरा हुआ।

हॉलेज रोप वे (हेरिटेज ट्राली लाइन) दुनिया भर में अपनी तरह की एक अनूठी ट्रॉली है। इस ट्राली लाइन की कुल लंबाई 10.65 किलोमीटर है तथा कुल 6 चरणों में चलाई जाती थी। वर्तमान में शानन की ओर से केवल दो चरणों में ही यह ट्राली लाइन विंच कैंप तक चलती है जबकि अंतिम चरण में जीरो प्वाइंट से बरोट डैम साईट तक इस लाइन को उखाड़ दिया गया है।

ऊहल नदी व लंबाडग नदियों में प्राकृतिक तौर पर ट्राउट मछली पाई जाती है तथा एंगलिंग के शौकीन पर्यटकों के लिए यह स्थान उपयुक्त है। इसके अलावा बरोट व आसपास के गांव में देवदार, कायल, बान, बुरांस इत्यादि के घने जंगल यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को चार चांद लगाते हैं। इसके अतिरिक्त टै्रकिंग के शौकीन पर्यटकों के लिए भी कई बेहतरीन स्थान मौजूद हैं। बरोट से लगभग 5 किलोमीटर दूर रूलंग नाला वाटरफॉल स्थित है जिसका पर्यटक आनंद उठा सकते हैं।

साथ ही बरोट गांव के समीप ही जलान में कर्नल बी.सी. बैटी द्वारा निर्मित ऐतिहासिक विश्राम गृह भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। धार्मिक दृष्टि से देव श्री हुरंग नारायण जी व देव श्री पशाकोट जी यहां के प्रमुख देवता हैं। देव हुरंग नारायण जी का मंदिर गांव हुरंग में है जो बरोट से लगभग 30 किलोमीटर जबकि देव पशाकोट के अलग-अलग मंदिर हैं जिनमें नालदेहरा (टिक्कन) बरोट से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मंदिर प्रमुख है। इसके अलावा चौहार घाटी में कई अन्य देवी देवताओं के भी मंदिर मौजूद हैं।

पर्यटक देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त कर आध्यात्मिक दृष्टि से एक अलग अनुभूति प्राप्त कर सकते हैं। देव परंपरा के अनुसार देव स्थानों में चमड़े से निर्मित वस्तुओं सहित प्रवेश तथा धूम्रपान पूर्णतया निषेध है। इसके अतिरिक्त कई गांवों में भी चमड़े से बनी वस्तुओं व धुम्रपान करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। चौहार वासियों ने देव आस्था सहित लोक परंपराओं व मान्यताओं को अभी भी जिंदा रखा हुआ है। पुरातन समय में चौहार घाटी मंडी रियासत का हिस्सा रही है।

पर्यटकों के ठहराव को यहां कई होम स्टे, होटल तथा सरकारी विश्राम गृह मौजूद हैं। इसके अलावा प्रकृति का आनंद उठाने को कई कैंपिंग साइट्स भी उपलब्ध हैं। चौहारघाटी का बरोट तथा छोटा भंगाल क्षेत्र सडक़ मार्ग से प्रमुख धार्मिक स्थल बैजनाथ से लगभग 55 से 60 किलोमीटर तो वहीं मंडी के ओर से भी पर्यटक इतना ही सफर तय कर यहां पहुंच सकते हैं। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन लगभग 40 किलोमीटर दूर जोगिन्दर नगर है जबकि हवाई अड्डा कांगडा धर्मशाला है।

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