Ram Temple Investigation completed : लखनऊ। पिछले दिनों अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की शुरू हुई जांच अब पूरी हो गई है। इस मामले में गठित 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने जांच पूरी कर ली है। SIT ने इस मामले से जुड़ी अपनी विस्तृत रिपोर्ट Additional Chief Secretary (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है।
यह अंतिम रिपोर्ट नहीं, चल रही जांच
इस सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि जांच की कारर्वाई अभी प्रचलित है। यानी यह अंतिम रिपोर्ट नहीं है और मामले की जांच अभी आगे भी जारी रहेगी। अयोध्या प्रकरण को लेकर SIT ने पिछले दिनों कई स्तरों पर जांच, पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल की थी। अब प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद इस संवेदनशील मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। चढ़ावा प्रकरण 7 जून को सामने आने के बाद राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल ने सोमवार 15 जून को अपनी जांच शुरू की थी। इस मामले में महासचिव चंपतराय, डॉ. अनिल मिश्र और व्यवस्थापक गोपाल राव से व्यवस्थाओं की जानकारी लेकर जांच आगे बढ़ाई और नकदी की गणना और मंदिर व्यवस्था से जुड़े लगभग 150 लोगों के बयान दर्ज किए।
3 दिन तक अलग से पूछताछ
चंपत राय के चालक रहे रामशंकर यादव टिन्नू और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के बयानों का भी मिलान किया। असमानता मिलने पर लगातार 3 दिन इन दोनों से पूछताछ हुई। इस मामले में संदिग्ध पाए गए अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव सहित ट्रस्ट, बैंक से जुड़े कुल 14 लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए। 6 दिनों की जांच में कई प्रकार की खामियां मिलीं और दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव टिन्नू के पास पाई गईं।
इस मामले में ये तथ्य आए सामने
SIT की जांच में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिनमें मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी सवालों के घेरे में हैं। अयोध्या से शनिवार को लखनऊ लौटी SIT मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंप सकती है। उसके बाद दोषियों और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सकती है। 13 जून को गठित SIT जांच के लिए 15 जून को अयोध्या पहुंची थी। इसमें शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज आईजी किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने छह दिन में ट्रस्ट के पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों, गणना कर्मियों व पकड़े गए संदिग्धों से लंबी पूछताछ की।
चढ़ावे में से हो गई थी चोरी की पुष्टि
सूत्रों की तो चढ़ावे की राशि में चोरी की पुष्टि हुई है। इसे संदिग्धों ने स्वीकारा भी है। एसआईटी ने तमाम लोगों के बयान दर्ज किए। टिन्नू से तीन दिन लगातार पूछताछ की गई। टिन्नू ने दान राशि की गणना से लेकर उसे जमा कराने की व्यवस्था में अनिल मिश्रा व गोपाल राव की भूमिका बताई। अन्य गवाहों ने भी इन दोनों के नाम प्रमुखता से लिए। एसआईटी ने करीब 150 लोगों से पूछताछ की। करीब 30 लोगों की भूमिका गबन में संदिग्ध मिली। इसमें ट्रस्ट के 3-4 पदाधिकारियों समेत प्रबंधन के 20-25 लोगों की लापरवाही सामने आई।
प्रबंधन अनुभवी लोगों को देने की पैरवी
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक इंटरव्यू में फिर राम मंदिर के प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में करीब 1500 लोग अनौपचारिक तरीके से काम कर रहे हैं। यह एक मिनी सिटी की तरह है। उन्होंने कहा कि उनका निश्चित मत है कि पूरा प्रबंधन अनुभवी लोगों के हाथ में सौंप दिया जाना चाहिए। प्रबंधन के अंदर कोई स्ट्रक्चर नहीं है। काम का कोई बंटवारा नहीं है। प्रबंधन को अनुभवी हाथों में देना होगा। जिम्मेदारी स्पष्ट करनी होगी। नियम बने, वेतन हो, ऐसा सुझाव है।
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