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”कुत्तों के बढ़ते हमलों व रेबीज़ से होने वाली मौतों पर बहस तो छिड़ती है, लेकिन समाधान नहीं निकलता”

October 29, 2023

”कुत्तों के बढ़ते हमलों व रेबीज़ से होने वाली मौतों पर बहस तो छिड़ती है, लेकिन समाधान नहीं निकलता”

नई दिल्ली : 19वीं सदी की अमेरिकी कवयित्री एमिली डिकिंसन ने एक बार कहा था, ‘कुत्ते इंसानों से बेहतर हैं, क्योंकि वे जानते हैं लेकिन बताते नहीं हैं।‘ आजकल, ऐसा लगता है कि पालतू जानवरों द्वारा मनुष्यों के प्रति आक्रामकता प्रदर्शति करने के मामलों की बढ़ती संख्या ने इस धारणा को चुनौती दी है कि जानवर हमेशा अपने विचार अपने तक ही सीमित रखते हैं।

हाल ही में अहमदाबाद में व्यवसायी पराग देसाई के निधन ने आवारा कुत्तों के हमलों के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को एक बार फिर से ध्यान में ला दिया है। दुखद बात यह है कि सुबह की सैर के दौरान सड़क पर कुत्तों के एक झुंड द्वारा पीछा किए जाने के कारण देसाई की जान चली गई। घटना में सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण कुछ दिनों बाद ब्रेन हैमरेज के कारण उनकी मृत्यु हो गई।

देसाई के साथ हुई घटना कोई अलग मामला नहीं है। आवारा कुत्तों के हमले, जिन्होंने बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों सहित कई लोगों की जान ले ली है और उन्हें घायल कर दिया है, पूरे देश में चिंता का विषय बने हुए हैं। हाल के वर्षों में सड़क और पालतू कुत्तों दोनों से जुड़ी ऐसी घटनाएं अक्सर सुर्खयिां बनी हैं। नवंबर 2022 तक संसद के आंकड़ों से पता चला कि 2019 और 2022 के बीच भारत में आवारा कुत्तों के काटने के 16 मिलियन मामले सामने आए, यानी प्रतिदिन औसतन 10,000 से अधिक मामले। इसके अलावा, राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम ने 2012 और 2022 के बीच मानव रेबीज के 6,644 संदिग्ध मामलों और संबंधित मौतों की सूचना दी।

अकेले 2022 के पहले दस महीनों में, केरल और पंजाब में कुत्ते के काटने के 10,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और कश्मीर में 1,000 से 10,000 तक मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2019 में भारत में कुत्तों के काटने से 4,146 लोगों की मौत हुई। विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने भारत के पशु स्वास्थ्य देखभाल और नियंत्रण तंत्र में अपर्याप्तता के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है, जिसने आवारा कुत्तों की आबादी के अनियंत्रित प्रसार में योगदान दिया है। भोजन की कमी और संक्रमण जैसे कारकों को इन कुत्तों के आक्रामक व्यवहार के लिए ट्रिगर के रूप में उद्धृत किया गया है।

बढ़ती समस्या के जवाब में, आवारा कुत्तों के खतरे से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कुत्तों के हमलों के परेशान करने वाले वीडियो ने सार्वजनिक कार्रवाई की मांग को तेज कर दिया है। ये घटनाएं अक्सर आवारा जानवरों के कल्याण की वकालत करने वाले पशु प्रेमियों और सार्वजनिक स्थानों पर उनकी उपस्थिति का विरोध करने वालों के बीच टकराव का कारण बनती हैं। पराग देसाई की दुखद मौत के बाद वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा के एक ट्वीट ने समर्थन और विवाद दोनों को जन्म दिया। उन्होंने सलाह दी, ‘सुबह की सैर पर आवारा कुत्तों से सुरक्षित रहने के लिए एक छड़ी साथ रखें। यदि आपके क्षेत्र में कुत्ते प्रेमी कार्यकर्ता हैं, तो एक बड़ी छड़ी रखें।‘

विरोध का सामना करते हुए, उन्होंने बाद में स्पष्ट किया, ‘मैं किसी भी तरह से हिंसा की वकालत नहीं कर रहा हूं। मेरी एकमात्र चिंता यह है कि कोई भी कुत्ते के काटने का शिकार न हो। जब कोई टहलने के लिए बाहर जाता है, तो वह अपने साथ रक्षा के लिए छड़ी ले जाने को मजबूर होता है। कोई भी कुत्ते को चोट पहुंचाने के इरादे से टहलने नहीं जाता है। कुत्ते प्रेमी-कार्यकर्ताओं को यह समझना और स्वीकार करना चाहिए कि आवारा कुत्ते एक समस्या हैं।‘

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