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नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह ‘नाम पुकारे जाने‘ से नाराज नहीं है और न्यायसंगत और निष्पक्ष आलोचना के लिए खुला है, लेकिन अदालत या न्यायिक प्रणाली के कामकाज में बाधा डालने वाली किसी भी चीज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की खंडपीठ.