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श्रीराम कथा के पांचवें दिन बापू ने पनघटवृत्ति के बारे में बात की। कहा सत्युग का सार पनघट वो है, जहां पानी पूरी मात्रा में है और वो प्यासों की प्यास बुझाता है। सत्युग में सबको प्यास थी और प्यास को बुझाने की व्यवस्था थी। तेज दो प्रकार के होते हैं—प्रभाव का तेज, स्वभाव का.