साल 2023 जल्द ही समाप्त होने जा रहा है। आपको बता दें कि इस साल के अंत में 28 दिसंबर को साल का आखिरी गोचर लगने जा रहा है। इसी के साथ यह साल जाते जाते भी कई राशि के लोगों को फायदा पहुंचा कर जाएगा। साल 2023 के आखिरी तीन दिनों में तीन राशि.
अंक 1दिन का ज्यादा समय आपके लिए अच्छा रहेगा। कई तरह के मौके मिलेंगे। धन की प्राप्ति थोड़े से ही प्रयास करने में आपको सफलता मिलेगी। धन को अपने मित्रों और परिवार के साथ शेयर करने के लिए तैयार हैं। अंक 2आज आपके सामने कुछ आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापार में.
मेषआज का दिन आपके लिए किसी नये वाहन की खरीदारी के लिए रहेगा। आपको अपने आसपास में हो रहे वाद-विवाद में पड़ने से बचना होगा नहीं तो वह कानूनी हो सकता है। आप किसी अपरिचित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें, नहीं तो वह आपका कोई नुकसान करा सकता है। परिवार के सदस्यों के साथ आप.
रागु बिलावलु महला ५ घरु २ यानड़ीए कै घरि गावणाੴ सतिगुर प्रसादि ॥ मै मनि तेरी टेक मेरे पिआरे मै मनि तेरी टेक ॥ अवर सिआणपा बिरथीआ पिआरे राखन कउ तुम एक ॥१॥ रहाउ ॥ सतिगुरु पूरा जे मिलै पिआरे सो जनु होत निहाला ॥ गुर की सेवा सो करे पिआरे जिस नो होइ दइआला.
नव वर्ष का इंतज़ार सभी को बहुत ही बेसबरी से रहता है। नया साल शुरू होने से पांच दिन पहले आज क्रिसमस का त्योहार मनाया जा रहा है। इस त्यौहार को सभी लोग बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। क्रिसमस को बड़ा दिन भी कहते हैं। क्या आप जानते है कि क्रिसमस क्यों मनाया जाता.
मेष: इस सप्ताह मेष राशि के जातकों को पुरानी किसी समस्या का समाधान मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में इस हफ्ते आपको अच्छे लाभ मिल सकते हैं, हालांकि आपके ऊपर काम का दवाब अधिक बना रह सकता है। इस हफ्ते धन से जुड़ी समस्याएं आपकी कम हो सकती हैं तथा आपकी आय में वृद्धि के योग.
महाविद्याओं में छठवें स्थान पर विद्यमान त्रिपुर- भैरवी, संहार तथा विध्वंस की पूर्ण शक्ति है। त्रिपुर शब्द का अर्थ है, तीनों लोक ‘‘स्वर्ग, विश्व और पाताल’’ और भैरवी विनाश के एक सिद्धांत के रूप में अविस्थत हैं, तात्पर्य है तीन लोकों में सर्व नष्ट या विध्वंस कि जो शक्ति है, वह भैरवी है। इनके ध्यान.
अपने समयकाल में रावण ने शिव भगवान की घोर तपस्या की थी, यह बात आज भी हजारों वर्षों बाद आम जन के मुंह पर है। शिव की ही कृपा थी कि रावण ने इतनी अतुलित बल सम्पदा एकत्रित कर ली थी कि उसने नौ ग्रहों तक को अपने बस में कर रखा था। एक बार.
दत्तात्रेय जयंती मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की दशमी को मनाई जाती है। पुराणों के अनुसार दत्तात्रेय के तीन सिर व छ: भुजाएं थीं। ये त्रिदेवों के अंश माने जाते हैं। दत्तात्रेय अपनी बहुज्ञता के कारण पौराणिक इतिहास में विख्यात हैं। इनके जन्म की कथा बड़ी विचित्र है। कथा : एक बार नारद मुनि, भगवान शंकर, विष्णु.