Last Updated: November 5, 2026

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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 23 अक्टूबर 2025

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 18 अक्टूबर 2025

Hukamnama 18 Oct 2025 : धनासरी महला १ ॥ जीवा तेरै नाइ मनि आनंदु है जीउ ॥ साचो साचा नाउ गुण गोविंदु है जीउ ॥ गुर गिआनु अपारा सिरजणहारा जिनि सिरजी तिनि गोई ॥ परवाणा आइआ हुकमि पठाइआ फेरि न सकै कोई ॥ आपे करि वेखै सिरि सिरि लेखै आपे सुरति बुझाई ॥ नानक साहिबु.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 17 अक्टूबर 2025

Hukamnama 17 Oct 2025 : धनासरी महला ५ ॥ तुम दाते ठाकुर प्रतिपालक नाइक खसम हमारे ॥ निमख निमख तुम ही प्रतिपालहु हम बारिक तुमरे धारे ॥१॥ जिहवा एक कवन गुन कहीऐ ॥ बेसुमार बेअंत सुआमी तेरो अंतु न किन ही लहीऐ ॥१॥ रहाउ ॥ कोटि पराध हमारे खंडहु अनिक बिधी समझावहु ॥ हम अगिआन.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 16 अक्टूबर 2025

Hukamnama : सोरठि महला ३ घरु १ तितुकी॥ भगता दी सदा तू रखदा हरि जीउ धुरि तू रखदा आइआ ॥ प्रहिलाद जन तुधु राखि लए हरि जीउ हरणाखसु मारि पचाइआ ॥ गुरमुखा नो परतीति है हरि जीउ मनमुख भरमि भुलाइआ ॥१॥ हरि जी एह तेरी वडिआई ॥ भगता की पैज रखु तू सुआमी भगत तेरी.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 15 अक्टूबर 2025

Hukamnama 15 Oct 2025 : आसा महला ५ ॥ दिनु राति कमाइअड़ो सो आइओ माथै ॥ जिसु पासि लुकाइदड़ो सो वेखी साथै ॥ संगि देखै करणहारा काइ पापुकमाईऐ ॥ सुक्रितु कीजै नामु लीजै नरकिमूलि न जाईऐ ॥ आठ पहर हरि नामुसिमरहु चलै तेरै साथे ॥ भजु साधसंगतिसदा नानक मिटहि दोख कमाते ॥१॥ वलवंच करि उदरु.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 12 अक्टूबर 2025

Hukamnama 12 Oct 2025 : सलोकु मः ३ ॥ रे जन उथारै दबिओहु सुतिआ गई विहाइ ॥ सतिगुर का सबदु सुणि न जागिओ अंतरि न उपजिओ चाउ ॥ सरीरु जलउ गुण बाहरा जो गुर कार न कमाइ ॥ जगतु जलंदा डिठु मै हउमै दूजै भाइ ॥ नानक गुर सरणाई उबरे सचु मनि सबदि धिआइ ॥१॥.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 10 अक्टूबर 2025

Hukamnama : तिलंग मः १ ॥ इआनड़ीए मानड़ा काए करेहि ॥ आपनड़ै घरि हरि रंगो की न माणेहि ॥ सहु नेड़ै धन कमलीए बाहरु किआ ढूढेहि ॥ भै कीआ देहि सलाईआ नैणी भाव का करि सीगारो ॥ ता सोहागणि जाणीऐ लागी जा सहु धरे पिआरो ॥१॥ इआणी बाली किआ करे जा धन कंत न भावै.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 09 अक्टूबर 2025

Hukamnama : गोंड महला ५ ॥ धूप दीप सेवा गोपाल ॥ अनिक बार बंदन करतार ॥ प्रभ की सरणि गही सभ तिआगि ॥ गुर सुप्रसंन भए वड भागि ॥१॥ आठ पहर गाईऐ गोबिंदु ॥ तनु धनु प्रभ का प्रभ की जिंदु ॥१॥ रहाउ ॥ हरि गुण रमत भए आनंद ॥ पारब्रहम पूरन बखसंद ॥ करि.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 08 अक्टूबर 2025

Hukamnama: सोरठि महला ५ ॥ सरब सुखा का दाता सतिगुरु ता की सरनी पाईऐ ॥ दरसनु भेटत होत अनंदा दूखु गइआ हरि गाईऐ ॥१॥ हरि रसु पीवहु भाई ॥ नामु जपहु नामो आराधहु गुर पूरे की सरनाई ॥ रहाउ ॥ तिसहि परापति जिसु धुरि लिखिआ सोई पूरनु भाई ॥ नानक की बेनंती प्रभ जी नामि.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 07 अक्टूबर 2025

Hukamnama 07 Oct 2025 : बिलावलु महला १ ॥ मन का कहिआ मनसा करै ॥ इहु मनु पुंनु पापु उचरै ॥ माइआ मदि माते त्रिपति न आवै ॥ त्रिपति मुकति मनि साचा भावै ॥१॥ तनु धनु कलतु सभु देखु अभिमाना ॥ बिनु नावै किछु संगि न जाना ॥१॥ रहाउ ॥ कीचहि रस भोग खुसीआ मन.

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 06 अक्टूबर 2025

Hukamnama 06 October 2025 : सोरठि महला ३ घरु १ तितुकी ॥ . भगता दी सदा तू रखदा हरि जीउ धुरि तू रखदा आइआ ॥ प्रहिलाद जन तुधु राखि लए हरि जीउ हरणाखसु मारि पचाइआ ॥ गुरमुखा नो परतीति है हरि जीउ मनमुख भरमि भुलाइआ ॥१॥ हरि जी एह तेरी वडिआई ॥ भगता की पैज.

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