Hukamnama 05 Oct 2025 : रागु सोरठि बाणी भगत कबीर जी की घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥जब जरीऐ तब होए भसम तनु रहै किरम दल खाई ॥ काची गागरि नीरु परतु है इआ तन की इहै बडाई ॥१॥ काहे भईआ फिरतौ फूलिआ फूलिआ ॥ जब दस मास उरध मुख रहता सो दिनु कैसे भूलिआ.
Hukamnama 23 September 2025 : सूही महला ३ ॥ जुग चारे धन जे भवै बिनु सतिगुर सोहागु न होई राम ॥ निहचलु राजु सदा हरि केरा तिसु बिनु अवरु न कोई राम ॥ तिसु बिनु अवरु न कोई सदा सचु सोई गुरमुखि एको जाणिआ ॥ धन पिर मेलावा होआ गुरमती मनु मानिआ ॥ सतिगुरु मिलिआ.
Hukamnama : सलोक ॥ रचंति जीअ रचना मात गरभ असथापनं ॥ सासि सासि सिमरंति नानक महा अगनि न बिनासनं ॥१॥ मुखु तलै पैर उपरे वसंदो कुहथड़ै थाइ ॥ नानक सो धणी किउ विसारिओ उधरहि जिस दै नाइ ॥२॥ अर्थ : जो परमात्मा जीवों की बनावट बनता है और उनको माँ के पेट में जगह देता.
Hukamnama : रागु धनासिरी महला ३ घरु ४ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ हम भीखक भेखारी तेरे तू निज पति है दाता ॥ होहु दैआल नामु देहु मंगत जन कंउ सदा रहउ रंगि राता ॥१॥ हंउ बलिहारै जाउ साचे तेरे नाम विटहु ॥ करण कारण सभना का एको अवरु न दूजा कोई ॥१॥ रहाउ ॥ बहुते.