Hukamnama : सोरठि मः ३ दुतुके ॥ सतिगुर मिलिऐ उलटी भई भाई जीवत मरै ता बूझ पाए ॥ सो गुरू सो सिखु है भाई जिसु जोती जोति मिलाए ॥१॥ मन रे हरि हरि सेती लिव लाए ॥ मन हरि जपि मीठा लागै भाई गुरमुखि पाए हरि थाए ॥ रहाउ ॥ बिनु गुर प्रीति न ऊपजै.
Today Hukamnama 25 July 2025 : सोरठि महला ९ ॥ मन रे प्रभ की सरनि बिचारो ॥ जिह सिमरत गनका सी उधरी ता को जसु उर धारो ॥१॥ रहाउ ॥ अटल भइओ ध्रूअ जा कै सिमरनि अरु निरभै पदु पाइआ ॥ दुख हरता इह बिधि को सुआमी तै काहे बिसराइआ ॥१॥ जब ही सरनि गही.